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ऐसे 4 प्रकार के लोगो से दूर रहना चाहिए जब कर रहे हो पूजा, या मांग रहे हो मन्नत

हमारी ही दुनिया में कई लोग ऐसे होते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और कई लोग अपने कर्मों और अपनी आदतों से नकारात्मक ऊर्जा देते हैं। और वैसे कहा जाता है, मंदिर जाते समय या भगवान के दर्शन बिल्कुल शांत मन से करना चाहिए। विचलित मन से की गई पूजा का फल नहीं मिलता है। इसलिए, धर्म ग्रंथों में श्रीरामकृष्ण परमहंस ने ऐसे 4 लोगों के बारे में बताया हैं, जो नकारात्मक ऊर्जो देने वाले होते हैं और ऐसे लोगों से देव पूजा या आराधना के समय दूर ही रहना चाहिए।



1.  नास्तिक :-

कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो भगवान और धर्म में आस्था नहीं रखते। जिन्हें ना तो धर्म-ज्ञान से कोई मतलब होता है, ना ही देव भक्ति से। ऐसा व्यक्ति धर्म और शास्त्रों में विश्वास ना होने की वजह से अधर्मी और पापी होता है। झूठ बोलना, बुरा व्यवहार करना आदि उसका स्वभाव बन जाता है। देव पूजा या दर्शन करते समय ऐसे व्यक्ति के आस-पास होने पर हम भी अपने काम पर पूरा ध्यान नहीं लगा पाते। ऐसे मनुष्य से हमेशा दूरी बनाएं रखनी चाहिए।

2. लालची :-

जिस मनुष्य के मन में लालच होता है, उसकी प्रवृत्ति चोर के समान हो जाती है। ऐसा व्यक्ति पूरे समय दूसरों की वस्तु पाने के बारे में ही सोचता रहता है। ऐसे व्यक्ति से दोस्ती रखने या उसके कामों में मदद करने पर हमारे भी पुण्य कर्मों का नाश हो जाते है और हम भी पाप के भागी ही माने जाते है। इसलिए, देव आराधना के समय ऐसे मनुष्य से कभी बात नहीं करनी चाहिए।



3. जलन की भावना रखने वाला :-

जो मनुष्य दूसरों के प्रति अपने मन में जलन की भावना रखता है, वह निश्चित ही छल-कपट करने वाला, पापी, धोखा देने वाला होता है। ऐसे मनुष्य का मन हर समय अशांत ही रहता है। ऐसे व्यक्ति से बात करने पर या मिलने पर वह अपनी बातों और आदतों से हमारा मन भी अशांत कर देता है। अशांत मन से की गई पूजा का फल कभी नहीं मिलती, इसलिए पूजा या दर्शन करते समय ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

4. जो दूसरों की निंदा करता हो :-

जो व्यक्ति दूसरों की निंदा या बुराई करता हो, ऐसा मनुष्य बुरे व्यवहार वाला होता है। दूसरों की निंदा करना मनुष्य व्यवहार का सबसे बड़ा दोष माना जाता है। ऐसे मनुष्य पूरे समय किसी न किसी की बुराई करता ही रहता है। ऐसे मनुष्य के आस-पास होने पर पूरे वातावरण की सकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है और शांति भंग हो जाती है। इसलिए, भगवान की पूजा या आरती करते समय ऐसे लोगों से दूर ही रहने की सलाह दी गई है।
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