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मरने से कुछ मिनट पहले ये सब सोचता है इंसान, जानकर हो जाएंगे आप भी हैरान!

हमारे दिमाग में मृत्यु को लेकर अनेक तरह की धारणाएं हैं, मौत के बाद क्या होता है, मरने के बाद इंसान की आत्मा कहां जाती है आदि। कई तरह के वैज्ञानिक और पौराणिक शोध भी इंसान की इस जिज्ञासा को शांत नहीं कर पाए हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि मृत्यु से चंद मिनट पहले, मरने वाला इंसान क्या सोचता होगा?





विशेषज्ञों की मानें तो मृत्यु को प्राप्त होने से पहले व्यक्ति जीवन के उन पलों को याद करता है जिसका संबंध उसके अच्छे और बुरे होने से है। व्यक्ति अपने उन बुरे कर्मों को याद करता है जब उसने जीवन जीने के दौरान दूसरे पर किए। वहीं हॉस्पिटल में काम करने वाली नर्सें जो  अकसर मृत्यु के दौरान अपने मरीजों के पास होती हैं, के अनुसार व्यक्ति स्वर्गवासी होने से पहले बहुत ही शांत रहने की कोशिश करता है।


उसका दिल बहुत ही बड़ा हो जाता है और उन सभी बातों की पोल खोलता है जिनके बारे में अब तक उसने किसी को नहीं बताया। यहीं नहीं वह मृत्यु से पहले खेद भी करता है कि उसने जिंदगी में वह सब चीजें क्यों नहीं की जिसके लिए वह इस दुनिया में आया था। आइए इसी तरह के खेदों को जानते हैं जिन्हें व्यक्ति मरने से पहले एक बार जरूर याद करता है...

मेरी इच्छा थी कि मैं अपने परिवार के लिए कुछ कर सकता :-

मरने से पहले इस तरह के विचार हर किसी के अंदर आते हैं खासकर पुरुषों के अंदर। क्योंकि घर की जिम्मेदारी अकसर पुरुषों के कंधों पर होती है और ज्यादातर वही अपने परिवार के लिए उत्तरदायी होते हैं। ऐसे में यदि मरीज को लगता है कि उसने अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया तो वह इसके लिए खेद जताता है।


सपने पूरे न होने का खेद :-

यह एक सामान्य तरह का खेद है जो हर कोई मरने से पहले जताता है। मृत्यु से पूर्व इंसान उन सभी बातों को याद करता है जिसको उसने या तो अधूरा छोड़ दिया या फिर शुरू ही नहीं किया।

मुझे खुद की इच्छा को व्यक्त करने की प्रेरणा मिल जाती :-

यह एक ऐसा खेद है जिसे व्यक्ति जीवित रहने के दौरान भी कई बार जता चुका होता है। जैसे काश मैं उसे अपनी फीलिंग बता देता तो आज वह मेरी होती, अपनी फीलिंग न बताने की वजह से ही मेरे दोस्तों ने मुझे गलत समझा आदि। इस तरह की इच्छा मरने से पहले भी एक इंसान को सताती है।


मैं दोस्ती निभा सकता :-

इस तरह का एहसास उस व्यक्ति को सबसे ज्यादा होता है जिसने अपनी जिंदगी में अपने ही दोस्तों को मुसीबत के समय धोखा दिया हो या फिर दोस्ती का फर्ज नहीं निभाया हो। स्वर्गवासी होने से पहले वही व्यक्ति खेद जताते हुए अपने इन्हीं दोस्तों से क्षमा मांगना चाहता है।

काश मैं खुद को खुश रख पाता :-


सबकी चिंता करने के बाद अंत में मृत्यु से पहले व्यक्ति खुद के बारे में भी सोचता है। खुद को खुश रखने के लिए अपनी जिंदगी में उसने कुछ किया क्यों नहीं? वह क्यों पारंपरिक सोच पर कायम रहते हुए आधुनिक चीजों को दरकिनार करता रहा? जैसी बातें इंसान को याद आती है। 
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