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Video : लंदन में चीनी दूतावास के पास बलूचों का प्रदर्शन, जमकर लगे मोदी-मोदी के नारे

बलूचिस्तान का मुद्दा पूरी दुनिया में जोर पकड़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान का जिक्र भर किया था उसके बाद से दुनिया भर में बलूच अपनी आवाज बुलंद करते दिख रहे हैं। बलूचिस्तान में पाकिस्तान और चीन की साझेदारी में बन रहे चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीइसी) का विरोध भी पाकिस्तान के बाहर जोर पकड़ लिया है।

जर्मनी के बाद ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बलूच और सिंधी नेता चीनी दूतावास के सामने सीपीइसी का विरोध कर रहे हैं। सिंधी और बलूच नेताओं के हाथों में 'नो सीपीइसी' की तख्तियां हैं। ये 'पीएम मोदी फोर बलूचिस्तान' के नारे लगा रहे हैं। चीनी दूतावास के बाहर लोग एक आवाज में नारे लगा रहें हैं- कदम बढ़ाओ मोदी जी हम तुम्हारे साथ हैं।

प्रदर्शन के दौरान बलूच नेता नूरदीन मेगल ने कहा, 'बलूच जनता की सहमति के बिना चीन और पाकिस्तान कुछ नहीं कर सकते। चीन और पाकिस्तान की नीति है कि जो चीज छीन सकते हो उसे छीन लो। दोनों देशों की यही कोशिश रहती है। हम दोनों देशों से साफ कहते हैं कि आप बिना बलूच जनता की सहमति से सीपीइसी पर काम नहीं कर सकते।' वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के चेयरमैन लखु लुहाना ने कहा कि हम किसी भी कीमत पर सीपीइसी प्रॉजेक्ट को कबूल नहीं कर करेंगे।

चीनी दूतावास के सामने बलूच और सिंधी 'है हक हमारा आजादी' के नारे लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बलूच जनता और पीओके के लोगों के प्रति आभार भी जाताया था।

मोदी के इस बयान का पाकिस्तान से नाराज बलूचों और पीओके के लोगों ने जमकर स्वागत किया था। पीएम के इस बयान का असर पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सीधे तौर पर दिखा। बलूचों ने पाकिस्तान में ही मोदी की तस्वीर के साथ तिरंगे लहराए। अफगानिस्तान ने भी मोदी के बयान का समर्थन किया। मोदी के समर्थन को लेकर पाकिस्तान ने बलूच नेताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की। इन पर राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले तय किए गए हैं।


कहा जा रहा है कि मोदी ने बलूचिस्तान का नाम उस वक्त लिया जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। ऐसे में माना जा रहा कि मोदी ने रणनीतिक रूप से बढ़िया वक्त चुना है। अफगानिस्तान खुलकर कह रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को उसकी जमीन पर बढ़ावा दे रहा है। बलूच लोग अफगानिस्तान में भी रहते हैं। पाकिस्तान में चीन की बढ़ती गतिविधियों का बलूच खुलकर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान से लाखों की संख्या में बलूच विस्थापित होकर अफगानिस्तान गए हैं।


पाकिस्तानी आर्मी के बारे में कई ऐसी रिपोर्ट आई है कि वह बलूचिस्तान में बर्बर तरीके से पेश आ रही है। पाकिस्तान ने जिन हजारों बलूच यूथ को हिरासत में रखा था वे आज तक घर लौट नहीं नहीं पाए। कहा जा रहा कि इन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। अमेरिका ने भी बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि चीन मोदी के इस कदम से खुश नहीं है। चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी के इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फिर से पाकिस्तान अहम हो जाएगा।
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