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अच्छी खबर : मोदी सरकार ने दी राफेल डील को मंजूरी, अब नहीं बचेगा पाक!

उरी में जवानों पर हुए आतंकी हमले का पूरा देश बदला लेने की मांग कर रहा है। वहीँ एक खुशखबरी मोदी सरकार ने दी है।



मोदी सरकार ने फ्रांस से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमान राफेल की डील को मंजूरी दे दी है। बताया जाता है की इस डील पर शुक्रवार तक हस्ताक्षर हो जाएंगे। बता दे की रफाल के जो दाम फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी ने कोट किए थे, उससे 4500 करोड़ रुपयों कम में ये डील फाइनल हुई है। यानि सौदेबाजी में भारत रफाल के दामों को 4500 करोड़ कम करवाने में सफल हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक डील 7.8 अरब यूरो यानी 58 हज़ार 646 करोड़ रूपयों की थी। यानि भारत को एक रफाल लड़ाकू विमान 1 हज़ार 6 सौ 28 करोड़ रुपयों का पड़ता। लेकिन अब ये 1504 करोड़ रुपयों का पड़ेगा। 

हालांकि सरकार को आधिकारिक तौर पर रफाल विमानों के दामों का खुलासा करना बाकी है। लेकिन दामों के बारे के डील पर दोनों देशों के बीच फाइनल हस्ताक्षर होने के बाद ही खुलासा होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 महीने पहले फ्रांस यात्रा के दौरान फ़्रांस से 36 रफाल विमान खरीदने का ऐलान किया था। इस दौरान दोनों देशों ने गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के लिए समझौता भी किया था। रफाल लड़ाकू विमानों को फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी बनाती है।

इस डील के मुताबिक पहले 18 रफाल फाइटर फ्लाई अवे कंडीशन में सीधे फ़्रांस से आएंगे। जबकि बाकी के रफाल लड़ाकू विमानों को हिंदुस्तान में ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से बनाया जाएगा। एमएमआरसीए डील की तर्ज पर ही इस डील में 50 प्रतिशत ओफ़्सेट क्लॉज़ का प्रावधान रखा गया है। यानी फ्रांस को कॉन्ट्रैक्ट राशि का आधा पैसा हिंदुस्तान में ही निवेश करना पड़ेगा।


सूत्रों के मुताबिक डसाल्ट एविएशन 36 रफाल लड़ाकू विमानों को उसी कनफिगरेशन में देगी जैसा मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट ट्रायल के दौरान टेस्ट किया गया था। एमएमआरसीए परिक्षण में रफाल ने यूरोफाइटर टाइफून, अमेरिकी कंपनी बोइंग के एफ/ए 18 सुपर होर्नेट, लॉकहीड मार्टिन के एफ-16 और रूस के मिग-36 और स्वीडन के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों को पीछे छोड़ दिया था।
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