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10 से 20 रु. में मिलने वाले एक बम की असली कीमत जानकर दंग रह जायेंगे आप...

रस्सी बम सिर्फ एक स्र्पए का होता है, लेकिन ग्राहक तक आते-आते आठ से दस रुपए का हो जाता है। यही हाल फूलझड़ी, लड़ और अनार का है। ये पटाखे भी वास्तविक कीमत से पांच गुना अधिक पर बिकते हैं।



हमने पटाखों के इस मार्केट की पड़ताल की तो पता चला कि पटाखों से कारोबारियों की तो दीपावली होती है, लेकिन खरीदने वालों की जेब जलती है।

कुछ सालों से आतिशबाजी पर भी महंगाई की मार पड़ने लगी है। ये महंगाई वास्तविक कम और कृत्रिम अधिक है। दीपावली का सीजनल कारोबार करने वाले व्यापारी पटाखों के भारी दाम वसूलते हैं।

देश में पटाखों का सबसे बड़ा हब तमिलनाडु का शिवाकाशी है। वहां से बनकर आने वाले पटाखे जब इंदौर या मध्यप्रदेश के अन्य गांवों और शहरों में पहुंचते हैं तो इनकी कीमत दस गुना तक बढ़ जाती है।

500 एमआरपी, बिकते-बिकते 100 :-

पटाखों में मेक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) का भी बड़ा खेल है। पटाखा निर्माता जिस पैकेट पर 500 रुपए की एमआरपी डालते हैं, वह बाजार में 100 रुपए तक और कई बार इससे भी कम में बिकता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पटाखे के कारोबार में निर्माता से लेकर ट्रेडर तक मुनाफे का कितना मार्जिन लेकर चलते हैं।

बिना बिल का कारोबार, टैक्स की चोरी :-

पटाखा कारोबार में टैक्स की भी खूब चोरी होती है। अधिकांश कारोबारी शिवाकाशी और अन्य जगहों से बिना बिल का माल मंगवाते हैं। इससे उन्हें अलग-अलग प्रदेशों में कमर्शियल टैक्स नहीं भरना पड़ता। टैक्स बचाकर भी कई कारोबारी मुनाफा कमाते हैं।

मध्यप्रदेश में पटाखों पर वैट 14 प्रतिशत है और 2 प्रतिशत एंट्री टैक्स है। कमर्शियल टैक्स विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अब राज्य के बाहर से पटाखा लाने पर फॉर्म-49 अनिवार्य कर दिया गया है।

इसलिए बिना बिल का माल आने की गुंजाइश कम हो गई है। फिर भी कुछ कारोबारी बिना बिल का माल लाते हों तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। बताया जाता है कि हाल ही में विभाग ने शिवाकाशी से अवैध तरीके से लाए गए पटाखे के दो ट्रक पकड़े। इन पर 7 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।

लाइसेंस जांचते हैं :-

प्रशासन पटाखे बेचने के लाइसेंस तो जारी करता है लेकिन कीमत पर कोई नियंत्रण नहीं है। दुकानदार पटाखों की एमआरपी से काफी कम में बेचते हैं। लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है, यह हम जरूर चेक करते हैं।


राऊ में चेकिंग के दौरान पता चला कि लाइसेंस किसी और के नाम पर जारी हुए हैं, लेकिन दुकान पर कोई और बैठा था। ऐसे लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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