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अमेरिका में छिन सकती है हिंदुओ की धार्मिक आजादी, पढ़ें पूरी खबर!

मुस्लिम देशों पर बैने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे दो और फैसले ले सकते हैं जिनसे अमेरिका ही नही पूरी दुनिया में विवाद खड़ा हो सकता है।



पहला- आतंकवाद के खिलाफ उनकी पॉलिसी में सिर्फ इस्लामिक कट्टरपंथ पर फोकस रहेगा। हिंसा फैलाने वाले व्हाइट्स इसके दायरे में नहीं होंगे। दूसरा- वे ऐसा विवादित एग्जीक्यूटिव ऑर्डर लाने की तैयारी में हैं जो अमेरिका में धार्मिक आजादी को रोकेगा।

अगर वे नए ऑर्डर पर साइन कर देते हैं तो अमेरिका के लोग और वहां के ऑर्गनाइजेशंस को उन लोगों के साथ भेदभाव का हक मिल जाएगा, जो दूसरे धर्मों को मानते हैं। यूएस मीडिया का कहना है कि अगर ट्रम्प ऐसा ऑर्डर जारी करते हैं तो इससे सोसायटी में बड़े पैमाने पर भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।

धार्मिक आजादी रोकने का ड्राफ्ट ऑर्डर तैयार :-

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी शॉन स्पाइसर ने बताया कि ट्रम्प इस बारे में विचार कर रहे हैं कि धर्म से जुड़ी पॉलिसीज को मानने की मजबूरी से अमेरिकियों को कैसे आजादी दी जाए।

हमारे देश में धर्म की आजादी है। लेकिन मुझे लगता है कि लोगों को उनका धर्म मानने, उसे एक्सप्रेस करने की आजादी करनी चाहिए। कभी-कभी पॉलिटिकल करेक्टनेस के नाम पर मामला इसके उलट भी हो सकता है। इस बारे में आखिरी फैसला प्रेसिडेंट को करना है।

क्या है ड्राफ्ट ऑर्डर?

ड्राफ्ट ऑर्डर में ऐसे कई सुझाव शामिल हैं जिनकी कंजर्वेटिव क्रिश्चियन्स लंबे वक्त से मांग कर रहे थे। इसमें उन संगठनों को कानूनी हिफाजत देने की मांग शामिल है जो कई तरह सर्विसेस में धर्म को आधार बनाकर एतराज जताते हैं।

द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, नए ऑर्डर पर अगर ट्रम्प साइन कर देते हैं तो खुद की आजादी से ज्यादा धर्म को तरजीह दी जाएगी। यानी धार्मिक संगठन, बिजनेसेस और इंडिविजुअल्स को उन लोगों के साथ भेदभाव करने का मौका मिल जाएगा जो उनसे सहमति नहीं रखते या जो दूसरे को धर्मों को मानते हैं।

और यही नहीं, अबॉर्शन कराने वाली महिलाओं से भी वर्कप्लेस पर भेदभाव होने लगेगा। LGBT कम्युनिटी को नौकरियां नहीं मिलेंगी और ट्रांसजेंडर्स को पब्लिक यूटिलिटी का इस्तेमाल करने से लोग रोक सकेंगे।

इस्लामिक कट्टरपंथ पर ही फोकस करेंगे ट्रम्प :-

डोनाल्ड ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन आतंकवाद और कट्टरपंथियों के खिलाफ जो नई पॉलिसी इस्तेमाल कर रहा है, उसके निशाने पर सिर्फ इस्लामिक कट्टरपंथ है। एक न्यूज एजेंसी ने इस पॉलिसी से जुड़े पांच लोगों के हवाले से यह दावा किया है।

ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के वक्त इस पॉलिसी को काउंटरिंग वॉयलेंट एक्स्ट्रीमिज्मया सीवीई कहा जाता था लेकिन ट्रम्प इसे काउंटरिंग इस्लामिक एक्स्ट्रीमिज्मकह रहे हैं। कहा जा रहा है कि ट्रम्प इस तरह ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन की एक और पॉलिसी बदलने की तैयारी में हैं।


लेकिन इसमें हैरानी की बात ये है कि ट्रम्प ने इसमें हिंसा फैलाने वाले श्वेत गुटों को शामिल नहीं किया है। साफतौर पर ये भेदभाव वाला मामला है।
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